रबी सीजन 2026 की शुरुआत से पहले खाद की कीमतों को लेकर किसानों के बीच जो असमंजस और चिंता बनी हुई थी, अब उसमें कुछ हद तक राहत मिलती दिखाई दे रही है। खेती की बढ़ती लागत, मौसम की मार और बाजार में फसलों के उतार-चढ़ाव के बीच खाद के दाम हमेशा से किसानों के लिए सबसे अहम मुद्दा रहे हैं। ऐसे समय में यह खबर किसानों के लिए थोड़ी सुकून देने वाली मानी जा रही है कि इस साल प्रमुख उर्वरकों की कीमतों में कोई बड़ा उछाल देखने को नहीं मिला है।
जानकारी के अनुसार, इस रबी सीजन में यूरिया की कीमत लगभग पिछले साल के आसपास ही बनी हुई है। सामान्य तौर पर 45 से 50 किलो की यूरिया बोरी किसानों को 240 से 270 रुपये के बीच मिल रही है। गांवों में बात करें तो किसान यही कह रहे हैं कि कम से कम यूरिया के दाम काबू में हैं, नहीं तो गेहूं और चने की खेती करना और मुश्किल हो जाता। यूरिया पर सरकारी सब्सिडी का असर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है, जिससे छोटे और मध्यम किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है।
डीएपी खाद की बात करें तो इसके दाम भी फिलहाल स्थिर नजर आ रहे हैं। बाजार में एक बोरी डीएपी लगभग 1350 से 1400 रुपये के आसपास बिक रही है। कुछ इलाकों में किसानों का कहना है कि कहीं-कहीं थोड़ी बहुत ज्यादा कीमत वसूली जाती है, लेकिन कुल मिलाकर बड़े स्तर पर कोई उछाल नहीं है। डीएपी गेहूं, सरसों और दलहनी फसलों के लिए बेहद जरूरी खाद मानी जाती है, इसलिए इसके दाम स्थिर रहना किसानों के लिए बड़ी राहत है।
पोटाश यानी एमओपी खाद की कीमत भी इस बार ज्यादा नहीं बढ़ी है। एक बोरी एमओपी करीब 1450 से 1500 रुपये के बीच उपलब्ध बताई जा रही है। वहीं एनपीके जैसी मिश्रित खादों के दाम उनके ग्रेड और पोषक तत्वों के अनुसार अलग-अलग हैं, जो लगभग 1000 रुपये से लेकर 1900 रुपये प्रति बोरी तक जाते हैं। किसान बताते हैं कि जरूरत के हिसाब से खाद चुननी पड़ती है, क्योंकि हर फसल के लिए अलग पोषण जरूरी होता है।
खेती से जुड़े जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में खाद की कीमतों को नियंत्रण में रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती थी। अगर सब्सिडी का सहारा न लिया जाता, तो यही खाद किसानों को कहीं ज्यादा महंगी पड़ती। इसका सीधा असर खेती की लागत पर पड़ता और अंत में फसल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती थी।
रबी हंगाम 2026 साठी खतांच्या दरांबाबत शेतकऱ्यांमध्ये मोठी चर्चा सुरू आहे. सध्या बाजारात युरिया खताची 45 ते 50 किलोची एक गोणी अंदाजे 240 ते 270 रुपयांना मिळत आहे आणि सरकारची सबसिडी असल्यामुळे युरियाचा दर तुलनेने स्थिर ठेवण्यात आला आहे. डीएपी खताबद्दल बोलायचे झाल्यास, 50 किलोची गोणी साधारणपणे 1350 ते 1400 रुपयांच्या दरम्यान विकली जात आहे, तर एमओपी म्हणजेच पोटॅश खताची किंमत 45 ते 50 किलोसाठी सुमारे 1450 ते 1500 रुपये आहे. एनपीके खतांमध्ये 10:26:26 या मिश्र खताची गोणी साधारण 1000 ते 1150 रुपयांना, तर 12:32:16 या एनपीके खताचा दर 1050 ते 1200 रुपयांच्या आसपास आहे. याशिवाय एसएसपी म्हणजे सिंगल सुपर फॉस्फेट खताची 45 ते 50 किलोची गोणी सध्या 900 ते 1050 रुपयांपर्यंत मिळत आहे. हे सर्व दर अंदाजे असून, जिल्हा, बाजार समिती आणि विक्रेत्यानुसार थोडाफार फरक पडू शकतो. त्यामुळे शेतकऱ्यांनी खत खरेदी करताना दरांची चौकशी करणे, बिल घेणे आणि जादा दर आकारले जात नाहीत ना याची खात्री करणे अत्यंत गरजेचे आहे, असे अनेक शेतकरी स्वतःच्या अनुभवातून सांगत आहेत.
गांवों में किसानों की बात सुनें तो खुशी के साथ-साथ थोड़ी चिंता भी दिखती है। किसान कहते हैं कि खाद के दाम तो अभी ठीक हैं, लेकिन समय पर और पूरी मात्रा में उपलब्धता भी उतनी ही जरूरी है। कई बार खाद की कमी के कारण मजबूरी में महंगे दामों पर खरीद करनी पड़ती है, जिससे सारा हिसाब बिगड़ जाता है।
कुल मिलाकर, रबी सीजन 2026 में खाद की कीमतों को लेकर स्थिति फिलहाल संतुलित नजर आ रही है। अगर आने वाले दिनों में भी यही हाल बना रहता है और खाद समय पर मिलती रही, तो किसानों को गेहूं, चना, सरसों जैसी फसलों की खेती में कुछ राहत जरूर मिलेगी। खेती आसान तो नहीं हुई है, लेकिन इस बार खाद के मोर्चे पर हालात थोड़े संभले हुए जरूर दिख रहे हैं।


